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यह किसकी नज़र लगी देहरादून को...

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यह किसकी नज़र लगी देहरादून को...

shikhrokiawaaz.com

06/18/2026


देहरादून-: मसूरी की तलहटी पर बसा, घाटी का विहंगम दृश्य दिखाता हुआ, कम लोग व शांत वातावरण, आबोहवा में शालीनता लिए उत्तराखंड़ की राजधानी देहरादून अब पहले जैसा नही रही। पहले जहां देहरादून में अधिकांश रिटायर्ड कर्मी सुकून की तलाश में अपना आशियाना बनाते थे वहीं *आज राजधानी देहरादून का नाम सुकून स्थान की जगह  "लॉ एंड आर्डर के लिए चैलेंज" बनते जनपदो के रूप में शामिल हो गया है। उन्नत राजधानी की श्रेणी में प्रयास करने के इतर अखबारों में  दून की तस्वीरें कहीं हत्या, गुंडागर्दी, गैंगस्टर, खूनी रंजिश, साम्प्रदायिक दंगे, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी,लव जिहाद,ड्रग तस्करी की अनगिनत कहानियों से भरा नज़र आ रहा है।*

राजधानी में बीते कुछ समय मे घंटाघर के मच्छी बाज़ार में कानून से बेख़ौफ़ एक युवक द्वारा एक युवती का सरेबाज़ार गला रेतने, तिब्बती मार्किट में एक गैस एजेंसी के मालिक की गोली मारकर हत्या, सिल्वर सिटी के बाहर गैंगस्टर की हत्या आदि मामलो ने जहां एक तरफ कुछ महीनों पहले दून को दहला दिया तो वहीं हाल ही में खेतो में पानी छोड़ने को लेकर दो पक्षो में हुए विवाद ने कब साम्प्रदायिक हिंसा का रूप ले लिया, किसी को पता ही नही चला। रातों रात विवाद इतना बढ़ गया कि हिन्दू संगठन के लोगो द्वारा मुस्लिम समुदाय के लोगो के खिलाफ मोर्चा खोल दिया गया। आलम ऐसा है कि 4 दिन से सहसपुर के बैरागीवाला क्षेत्र में भारी पुलिस बल तैनात है। जहां पहले मुस्लिम व हिन्दू समुदाय आपस मे त्योहारों को एकसाथ मनाता था, वहीँ आज गांव में सन्नाटा पसरा है, दोनो समुदाय एक दूसरे से बात नही कर रहे है।  राजधानी के शिमला बाईपास स्थित भुड्डी गांव ने कलयुग का रूप भी दिखाया है, जहां भाई ने भाई को बस इतनी बात पर गोली मार दी कि वह उसे अय्याशी करन व बेफिजूल खर्ची पर रोकता था। 


यह कुछ ही ऐसे मामले है जो इतने बड़े पैमाने पर ध्यान खींच रहे है जिन्होंने राजधानी की शांत आबोहवा में खौफ का माहौल बना दिया है, बाकी लॉ एंड आर्डर के लिए चैलेंज खड़ा करने वाले अन्य मामलों की भी कमी नही है।उत्तरप्रदेश, हरियाणा जैसे समीपवर्ती राज्यों से पैदल मार्ग से अपने राज्यो से गुनाह कर राजधानी में पनाह लेने वाले *अभियुक्तो की गिनती आज हर दिन बढ़ती जा रही है, जो कभी यहां कभी वहां अपराध कर जनपदो की सीमा में आसानी से आवाजाही कर रहे है। वह तो राजधानी में कोई अपराध हो और पुलिस छानबीन में जुटती है तब जाकर अभियुक्तो की लंबी चौड़ी हिस्ट्री सामने आती है।*


बीते कुछ वर्षों में राजधानी देहरादून के पछवा दून क्षेत्र में बड़े स्तर पर डेमोग्राफिक चेंज हुआ है, जहां पहले पछवा दून के क्षेत्र में हिन्दू व अल्पसंख्य समुदाय का अनुपात 80-20 था आज वह डेमोग्राफिक प्रतिशत 20-80 हो गया है। *पछवा दून इलाके के कई क्षेत्र ऐसे है जहां के लोगो के आधार कार्ड व मूल निवास पता करें तो अधिकांश उत्तरप्रदेश के निवासी है जो यहां आए तो कामगार बनके थे किंतु धीरे धीरे किराए के कमरे और अब अपने मकान में बस गए है।* जिससे निश्चिति लैंड जिहाद के मामलों में भी बढ़ोत्तरी होने की संभावनाओं से इनकार नही किया जा सकता है। कई इलाके पहले भी साम्प्रदायिक सौहार्द के साथ एकजुट होकर रहते थे, किन्तु आज उस सौहार्द में समुदाय-समुदाय वर्चस्व की चिंगारी सुलग रही है, जो चिंता बनती जा रही है।

इसमें गलती हमारे सरकार की भी है, उत्तराखंड के मूल निवासियों द्वारा सदैव से भू कानून लाने की मांग मुखर रूप से उठायी गयी किन्तु *राजनीतिक गलियारों में अपनों को फायदा पहुँचाने की नीयत की बदौलत भू कानून महज कानूनी शोपीस बनकर रह गया है, जहां बाहरी लोगों को राज्य में 300 गज से ज़्यादा जमीन लेने का अधिकार नही। अरे भई! कब्जा करने को 1 गज जमीन बहुत होती है और सरकार खुद से 300 गज थमा रही तो बाद में बाहरी लोगों के राज्य में बढ़ते हस्तक्षेप पर बहस व चिंता क्यों?*

राजधानी देहरादून में पछवा दून क्षेत्र में बाहरी लोगों का बड़ा  ठिकाना आज इसलिए भी है क्योंकि सेलाकुई आज बड़ा इंडस्ट्रियल हब बन गया है, जिसके तहत वहां काम करने वालो ने सेलाकुई व सहसपुर में अपना ठिकाना बनाया है और वहां रहने वाले अधिकांश बाहरी है, जिससे उत्तराखंड आज मूल उत्तराखंडियों का रहा है नही। और कोई बड़ी बात नही वोट बैंक के चलते वह लोग यहीँ के मूल निवासी बन गए हो और आगे भी बनते रहेंगे। 

राजधानी में आज बाहरी लोग आसानी से युवाओं को ड्रग की सप्लाई कर रहे है और यहां के युवाओं को ड्रग पैडलर भी बना चुके है। ऐसी तमाम परेशानियां आज राजधानी के सामने है जिससे निबटने को घटना के बाद एक्शन लेने की बजाय उसे अभी संज्ञान में लेना महत्वपूर्ण है वरना जैसे बैरागीवाला वाली घटना आज हुई है कल कोई और घटना होने में देर नही।*वरना वह दिन भी दूर नही जब राजधानी की गिनती मेरठ, मुजफ्फरनगर,गाजीपुर जैसे जनपदो के साथ होगी और आज की पीढ़ी कहेगी कि एक जमाने मे जब हमारा देहरादून शांत हुआ करता था*.........
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