News :
चोरी की घटनाओं में शामिल पंजाब का अंतरराज्यीय समाना गैंग आया दून पुलिस की गिरफ्त में नगुण बैरियर पर एएचटीयू की सघन चेकिंग, मानव तस्करी और महिला-बाल अपराधों को लेकर बढ़ाई सतर्कता ईमानदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता: उपराष्ट्रपति भारत का दमदार प्रदर्शन, पाकिस्तान को 5-3 से हराकर अगले दौर में बनाई जगह केले खरीदने के दौरान ठेले वाले ने ही महिला के बैग से उड़ाया गहने व नकदी का पर्स, गिरफ्तार अंकिता भण्डारी हत्याकांड के तीनों आरोपियों की जमानत खारिज उत्तराखंड बोर्ड का परीक्षाफल सुधार परीक्षा परिणाम घोषित, हाईस्कूल का परिणाम 96.07% पहुंचा* सीमांत गांवों में पिथौरागढ़ पुलिस की पहल,चौपाल लगाकर ग्रामीणों को किया जागरूक बंसत विहार पुलिस व एक बदमाश के बीच हुई मुठभेड़, बदमाश घायल, गिरफ्तार उपराष्ट्रपति के देहरादून आगमन को लेकर दून पुलिस ने शहरभर में लगाया कड़ा पहरा

ईमानदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता: उपराष्ट्रपति

  • Share
ईमानदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता: उपराष्ट्रपति

shikhrokiawaaz.com

08/19/2026


देहरादून-: अपने दो दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुँचे उपराष्ट्रपति सी0पी0राधाकृष्णन ने आज अपने दौरे के पहले दिवस इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (आईजीएनएफए) में प्रशिक्षु भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के 2025–2027 बैच  अधिकारियों तथा प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे रॉयल भूटान वन सेवा के अधिकारियों को संबोधित किया।

अपने सम्बोधन में उपराष्ट्रपति द्वारा सभीप्रशिक्षु अधिकारियों को बधाई देते हुए कहा कि विकसित भारत @2047 की दिशा में आगे बढ़ते हुए उन सभी को आने वाले महत्वपूर्ण दशकों में भारत के वनों, वन्यजीवों, जैव विविधता और बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालनी होगी।
उन्होंने कहा कि देश की परिस्थितिक सुरक्षा को मजबूत करने और वर्ष 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन के भारत के लक्ष्य को साधने में भारतीय वन सेवा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि विकास और संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, विकास संरक्षण संग चल सकता है। उन्होंने अधिकारियों से संरक्षण और विकास, परिस्थितिक सुरक्षा और आजीविका तथा वर्तमान आवश्यकताओं और भावी पीढ़ियों के हितों के बीच सर्वोत्तम संतुलन स्थापित करने का आह्वान किया।
पर्सनल बेस्ट के बजाय एक टीम के बेस्ट होने पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि निरंतर सामूहिक प्रयास ही राष्ट्रों और संस्थानों को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि हम सभी को उन समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और अनुभव का सम्मान करना चाहिए, जो पीढ़ियों से वनों और प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्रों के साथ सामंजस्यपूर्ण तरीके से जीवन जीते आए हैं।

लोक सेवा में ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि “ईमानदारी से कोई समझौता नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा कि कठिन निर्णय लेते समय संविधान, कानून, विज्ञान और व्यापक जनहित मार्गदर्शक होने चाहिए। 

वहीं वर्तमान समय मे फारेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका का संज्ञान लेते हुए उन्होंने नई पीढ़ी के वन अधिकारियों से रिमोट सेंसिंग, जीआईएस, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डेटा आधारित प्रणालियों को मैदानी अनुभव, विवेकपूर्ण निर्णय क्षमता तथा जन-संवेदनशीलता के साथ जोड़ने का आह्वान किया।उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत के सतत भविष्य के निर्माण में आधुनिक वैज्ञानिक वानिकी और भारत की सभ्यतागत ज्ञान-परंपरा को एक-दूसरे का पूरक बनना होगा।

अपने सम्बोधन में उपराष्ट्रपति द्वारा समय के साथ वन सेवाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वर्तमान बैच में लगभग 17 प्रतिशत अधिकारी महिलाएं हैं, जिसे उन्होंने एक उत्साहजनक बदलाव और नारी शक्ति का प्रमाण है। 

अपने सम्बोधन में उन्होंने अधिकारियों को आईएफएस को केवल एक श्रेठ जॉब व पद के तौर पर न लेते हुए अपने से अपनी जॉब में योगदान का मूल्यांकन इस आधार पर करने को कहा कि कितने वनों को उन्होंने पुनर्स्थापित किया, कितने वन्यजीवों की रक्षा की, कितने समुदायों का विश्वास अर्जित किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए वह कैसी विरासत छोड़ेंगे।उन्होंने अपने सम्बोधन के अंत मे सभी अधिकारियों से राष्ट्रीय हित को हमेशा सर्वोपरि रखने का आह्वान कर“राष्ट्र प्रथम” रखने को कहा।

इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, आईजीएनएफए के निदेशक डॉ. राजेंद्र प्रसाद, कोर्स निदेशक अजीता लोंगजाम आदि सम्मलित रहे।
Comments
comment
date
latest news
देहरादून के तीन छात्र राष्ट्रपति मुर्मू से मिले, रचनात्मक उपहारों ने जीता दिल

देहरादून के तीन छात्र राष्ट्रपति मुर्मू से मिले, रचनात्मक उपहारों ने जीता दिल