आज के दौर में सोशल मीडिया हमारी जिंदगी का सबसे तेज़ और प्रभावशाली माध्यम बन चुका है, जहाँ जानकारी कुछ सेकंड में करोड़ों लोगों तक पहुँच जाती है।
लेकिन इसी तेज़ी के कारण भ्रामक वीडियो और फेक कंटेंट भी बड़ी आसानी से फैल जाते हैं, जो लोगों में भ्रम, डर और गलत धारणाएँ पैदा कर देते हैं। कई बार बिना सत्यापन के वायरल हुई बातें समाज में तनाव तक ला देती हैं।
सोशल मीडिया पर वायरल भ्रामक वीडियो लोगों की सोच और व्यवहार पर तुरंत असर डालते हैं। तेज़ गति से फैलने वाली गलत सूचनाएँ लोगों की भावनाओं को सीधे छूती हैं कभी डर पैदा करती हैं, कभी गुस्सा और कभी भ्रम कई बार वीडियो इतने “विश्वसनीय” तरीके से बनाए जाते हैं कि आम लोग सच-झूठ का फर्क समझ ही नहीं पाते। लगातार शेयर होते कंटेंट को देखकर लोगों को लगता है कि अगर इतने लोग मान रहे हैं, तो यह जानकारी सही ही होगी, और यहीं से गलतफहमियों की शुरुआत होती है।
भ्रामक वीडियो पर विश्वास करने का सबसे बड़ा कारण है तत्काल प्रतिक्रिया की आदत और तथ्य और जाँच की कमी।
लोग तुरंत निर्णय लेने की जल्दी में बिना प्रमाण के ही वीडियो की बातों पर भरोसा कर लेते हैं, जिससे अफवाहें फैलती हैं और समाज में तनाव पैदा होता है। कई बार ऐसे वीडियो कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली स्थिति तक बना देते हैं।
इसलिए जरूरी है कि हर किसी को हर वायरल वीडियो को सच मानने से पहले उसका स्रोत, तथ्य और वास्तविकता जरूर परखनी चाहिए ताकि गलत सूचनाओं के प्रभाव से बचा जा सके।