देहरादून:उत्तराखण्ड स्पेशल टास्क फोर्स ने फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों के नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए मेरठ के एक गन हाउस मालिक को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार कराने में शामिल होने का आरोप है। जांच में इस पूरे मामले के तार उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखण्ड तक जुड़े होने के तथ्य सामने आए हैं।
STF के अनुसार थाना प्रेमनगर, देहरादून में फर्जी शस्त्र लाइसेंस और अवैध हथियारों से संबंधित मुकदमा दर्ज किया गया था। 15 जनवरी 2026 को मामले में गिरफ्तार अभियुक्त मनोज कुमार के कब्जे से एक फर्जी शस्त्र लाइसेंस, .30 बोर की सेमी-ऑटोमैटिक पिस्टल और पांच जिंदा कारतूस बरामद किए गए थे।
विवेचना के दौरान पता चला कि मनोज कुमार के शस्त्र लाइसेंस को सिरसा से मेरठ और बाद में देहरादून स्थानांतरित दर्शाया गया था। जब सिरसा जिलाधिकारी कार्यालय से लाइसेंस के संबंध में जांच की गई तो सामने आया कि उक्त लाइसेंस वहां से कभी जारी ही नहीं किया गया था। जांच के बाद लाइसेंस पूरी तरह फर्जी पाया गया।
मामले की आगे की जांच में STF को फर्जी लाइसेंस तैयार कराने में मेरठ स्थित शिवा शस्त्रागार के मालिक शैलेन्द्र पुत्र राजपाल की भूमिका के संबंध में साक्ष्य मिले। इसके आधार पर STF टीम ने शैलेन्द्र को मेरठ स्थित उसके पते से गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी शैलेन्द्र पुत्र राजपाल मेरठ के थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र स्थित गायत्री ग्रीन, बाईपास रोड का निवासी है। उसके खिलाफ कंकरखेड़ा थाने में BNS की विभिन्न धाराओं के तहत पूर्व में भी मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा प्रेमनगर, देहरादून में दर्ज फर्जी शस्त्र लाइसेंस के मामले में भी उसका नाम सामने आया है।
STF अब फर्जी शस्त्र लाइसेंस तैयार करने वाले इस अंतर्राज्यीय नेटवर्क की कड़ियों को खंगालने में जुटी है। जांच में सामने आए उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखण्ड से जुड़े लोगों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। STF अधिकारियों का कहना है कि इस संगठित अपराध में शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी साक्ष्य मिलने पर कड़ी वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कार्रवाई करने वाली STF टीम में निरीक्षक यादविंदर सिंह बाजवा, उपनिरीक्षक कमाल हसन, अपर उपनिरीक्षक योगेंद्र सिंह, कांस्टेबल दीपक चंदोला और कांस्टेबल दीपक नेगी शामिल रहे।