कविता
अर्जुन सिंह भण्डारी
आंदोलन से शुरू हुआ था सफर,
लाठियां खाई थी जिन आन्दोलनकारियो ने नमन है उन उत्तराखंड के सृजनकारो को,
उत्तराखंड़ को अस्तित्व में लाने को।।
उत्तर का "अंश" है,
हिमालय की गोद मे बसा है,
नदियों के कल-कल करते शोर का अस्तित्व है यहां,
मंदिरों की घंटियों में पावन भूमि का प्रमाण है यहां,
वेदों व कहनियो में देवो का वास जो है यहां।।
25 साल हो गये है आज मेरे उत्तराखंड को,
2 दशकों में उत्तराखंड ने कई उतार चढ़ाव देखे है,
संघर्ष के बाद की खुशियां देखी है,
तो 2013 आपदा के दर्द भी झेला है,
आज धराली, चमोली, पौड़ी,बागेश्वर, रुद्रप्रयाग- सबका दर्द भी सीने पर झेला है,
आंखों में आंसू, अपनो को खोने वाला दर्द सहा है,
पर उन सबसे उठकर खड़ा होकर अपना पुनः सृजन करने का संकल्प भी भरा है मेरे उत्तराखंड ने।।
युवाओं की भूमि है,
देश की सीमा पर प्राण न्योछावर किये है जिन वीरों ने उनको जन्मा है,
पहाड़ से लेकर कुमाऊं की परंपराओ का अद्भुत मिश्रण है यहां,
योगी, देवताओं, गंगा जैसे पावन नदियों के उद्गम व समागम का प्रदेश है मेरा,
'देवभूमि' के रूप में आज विश्वस्तरीय पहचान रखता है उत्तराखंड मेरा।।
केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम का प्रदेश है,
बर्फीली पहाड़ियों में सैलानियों का आकर्षण भी लिए हुए है,
बुग्याल, ताल, जंगलों के लिए विश्वविख्यात है,
अपने "अतिथि देवो भवः" मनोभाव के लिए भारत की पहचान है।।
25 साल में उत्तराखंड ने 'अनगिनत' उपलब्धियां कमाई है,
शून्य से शुरुआत तक आज देश के अग्रिम पहाड़ी राज्यो में पहचान बनाई है,
किसानो की ताकत, पुलिस बल की काबिलियत, कुशल प्रशासन, काबिल नेतृत्व,नारी सम्मान व युवा शक्ति के रूप में प्रदेश की नई कहानी भारत के नक्शे पर सुनहरे रंग में उभारी है।।
बहुत कुछ हासिल किया है,
कठिन भौगौलिक परिस्थिति के चलते बहुत कुछ गवांया भी है,
पर जज्बा है हर एक उत्तराखंड वासियो का जो हर विपत्ति में लड़ प्रदेश को आज 'उत्तराखंड' बनाया है।।