सोशल मीडिया के दौर में आजकल हर कोई जल्दी जल्दी में रहता है रील्स को स्क्रॉल करते करते कब समय निकल जाता है पता ही नहीं चलता, छोटी छोटी मनोरंजन से भरी रील्स व खबरे कब इतनी रोचक लगने लगती है पता ही नहीं चलता। जल्द बाजी के इस दौर में हर कोई सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से जल्द से जल्द आगे बढ़ने को सोचता है। सबसे जायदा लाइक्स और फर्स्ट आने के चक्करों में भ्रामक ख़बरों को लोग सच मान कर शेयर करने लगते है बिना कुछ तथ्य जाने।सबसे पहेले खबर चलने की होड़ में खबर की सत्यता पर ही सवाल खड़े हो गए है ।
हाल ही में मशहूर अभिनेता धर्मेंद्र की मौत की खबर को मीडिया में प्रमुखता से चलाया गया और ज़िंदा इंसान को ही श्रद्धांजलि अर्पित कर दी गई। यही नहीं कश्मीर में हुई घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव के चलते ही मीडिया द्वारा बढ़ चढ़ पर नफ़रती और हिंसक खबरे चलाई गई।पत्रकारिता को चौथा स्तम्ब कहा जाता है लेकिन भार्मिक और ग़लत जानकारी के कारण लोगो का पत्रकारिता से ही विश्वास उठता जा रहा है। एक दौर हुआ करता था जब कोई भी ख़बर जानने के लिए आँखे मूँद कर पत्रकार पर भरोसा किया जा सकता था लेकिन आज के दौर में पत्रकारिता को ही सवालों के घेरे में डाल दिया।