
देहरादून-: शहर के ट्रैफिक को बेहतरी से मैनेज करने को ट्रैफिक पुलिस से इतर सीपीयू इकाई को उत्तराखंड में इंट्रोड्यूस करने का विजन उत्तराखंड़ पुलिस का नवीन था किंतु समय के साथ सीपीयू केवल चालान काटने व यातायात नियमो के अनुपालन के दौरान आम जनता से झड़प के किस्सों में फंसने के चलते सीपीयू की छवि को थोड़ा आघात पहुँचा था। किन्तु आईजी ट्रैफिक कृष्ण कुमार वी0के0 द्वारा आईजी का पद सम्भालने के साथ ही सीपीयू को नए सिरे से शुरू करने का जिम्मा उठाया था। आईजी कृष्ण कुमार वी0के0 द्वारा सीपीयू की छवि को बेदाग बनाने व ट्रैफिक संचालन में कुशाग्र बुद्धि व क्विक एक्शन टीम को शामिल करने के लिए आंतरिक रूप से सीपीयू भर्ती निकालने का प्रस्ताव डीजीपी के सम्मुख रखा था,जिसके मानक बहुत ही कड़े थे। कड़े मानको में यह पहली बार था जब सीपीयू भर्ती में पारदर्शिता लाने को ऑनलाइन परीक्षा आयोजित की गई। जिसमे उत्तराखण्ड के 278 काबिल पुलिस कर्मियों ने सीपीयू परीक्षा ने प्रथम चरण में लिखित परीक्षा पास की।
उत्तराखंड पुलिस द्वारा इस बार सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) में पुलिस कर्मियों को सीधे तौर पर मात्र सेवा रिकॉर्ड, वरिष्ठता या सामान्य इंटरव्यू के आधार पर चुनने के बजाय पहली बार उन्हें कंप्यूटर आधारित ऑनलाइन परीक्षा(सीबीटी) के तहत चयनित किया। तर्क है कि चूंकि सीपीयू पुलिस विभाग का एक बेहद चुस्त, हाई-टेक और वीआईपी चेहरा माना जाता है, इसलिए इस बार सामान्य पुलिसिंग से हटकर मानकों को काफी कड़ा किया गया है।सीपीयू में भर्ती हेतु उत्तराखंड़ के सभी जनपदो में तैनात, अलग अलग इकाईयों में तैनात लगभग 1000 पुलिस कर्मियों ने आवेदन किया था। यह पहली बार था जब 950 पुलिस कर्मियों द्वारा चयन हेतु सीबीटी दिया गया।

खास बात यह है कि सीपीयू में शामिल होने के लिए एक तरफ उत्तराखंड पुलिस में जहां उपनिरीक्षक, कांस्टेबल व हेड कांस्टेबल के लिए कुल 200 पद शामिल किए थे।वहीं सृजित पद के विपरीत 278 पुलिस कर्मियों ने प्रथम चरण सीबीटी पार किया। सीबीटी पार करने वाले पुलिसकर्मियों में 176 कांस्टेबल एवं हेड कांस्टेबल, 102 एएसआई व एसआई शामिल रहे। आईजी ट्रैफिक द्वारा उत्तीर्ण पुलिस कर्मियों की दक्षता की सराहना की। परीक्षा उत्तीर्ण कर इंटरव्यू तक पहुँचने वाले कर्मियों में
उत्तराखंड पुलिस की विभिन्न इकाइयों जैसे कि सिविल पुलिस, आर्म्ड पुलिस, पुराने सीपीयू कर्मी,पीएसी और आईआरबी के जवान शामिल हैं। सितंबर अंत तक आईजी ट्रैफिक कार्यालय द्वारा परीक्षा उत्तीर्ण सभी 278 पुलिस कर्मियों का इंटरव्यू भी लिया जा चुका है। कर्मियों का फाइनल इंटरव्यू आईजी ट्रैफिक कृष्ण कुमार वी0के0 व एसपी ट्रैफिक मुख्यालय शाहजहाँ अंसारी ने लिया था। पूर्व में सीपीयू का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके पुलिसकर्मियों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है।
वहीँ सीपीयू में प्रस्तावित बदलाव के तहत इंस्पेक्टर स्तर पर भी नई नियुक्तियां की जानी हैं। इंस्पेक्टरों के चयन के लिए साक्षात्कार आयोजित किए गए हैं। साक्षात्कार के बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार योग्य अधिकारियों का चयन किया जाएगा।
योजना के अनुसार, चयनित नए इंस्पेक्टरों को वर्तमान में सीपीयू में तैनात पुराने इंस्पेक्टरों के स्थान पर जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस प्रकार नई व्यवस्था में इंस्पेक्टर से लेकर अन्य पुलिसकर्मियों तक नई टीम को शामिल करने की तैयारी है।
हालांकि, नियुक्तियों की अंतिम संख्या और तैनाती की तारीख आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
गौरतलब है कि डीजीपी दीपम सेठ के समक्ष उठे सीपीयू में नए पद सृजित करने के प्रस्ताव पर डीजीपी द्वारा सीपीयू को रिफार्म करते हुए समूची भर्ती को ही नए तौर पर करने के निर्देश दिए। जिसके तहत लंबे समय से खाली पड़े पदों सहित 2015 से ही सीपीयू जैसी तेज तर्रार यूनिट में भर्ती होने का मौका ढूंढ रहे कर्मियों के लिए यह बड़ा अवसर साबित हुआ। डीजीपी की स्वीकृति के बाद उत्तराखंड पुलिस द्वारा 200 पदों पर इंटरनल स्क्रीनिंग आयोजित की साथ ही नियम पहली बार कड़े कर दिए गए। जिसके अनुसार आवदेक कर्मी को पुलिस विभाग में कम से कम 3 से 5 वर्ष की संतोषजनक नियमित सेवा(बिना किसी गंभीर विभागीय दंड या प्रतिकूल प्रविष्टि के) पूरी होनी आवश्यक होती है। वहीं सीपीयू का काम सड़कों पर एक्टिव पेट्रोलिंग का होता है, इसलिए इसमें ऑनलाइन परीक्षा में सड़क, यातायात नियमो से जुड़े सवाल पूछे गए थे।

इस विशेष यूनिट में शामिल होने के लिए कर्मियों का पिछला विभागीय ट्रैक रिकॉर्ड पूरी तरह साफ होने का सबसे बड़ा मानक था। विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया में कर्मी पर पूर्व में किसी भी प्रकार की विभागीय जांच या प्रतिकूल प्रविष्टि वाले कर्मियों को स्क्रीनिंग से पहले ही बाहर कर दिया गया था।
