देहरादून:उत्तराखण्ड पुलिस मुख्यालय में आज गुरुवार को उत्तरी क्षेत्र पुलिस समन्वय समिति (एनआरपीसीसी) की 12वीं बैठक का आयोजन किया गया।
उक्त बैठक की अध्यक्षता उत्तराखण्ड के पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ ने की,इस बैठक में उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों ने भाग लिया।
बैठक का उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर पुलिस बलों के बीच सहयोग और समन्वय को मजबूत बनाना तथा उभरती चुनौतियों जैसे मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध,आपदा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा से निपटने के लिए साझा रणनीति तैयार करना रहा है।
इस अवसर पर डीजीपी दीपम सेठ ने कहा कि एनआरपीसीसी मंच न केवल अनुभव साझा करने का अवसर देता है, बल्कि यह आपसी विश्वास और सहयोग को भी नई दिशा प्रदान करता है,बेहतर समन्वय से उत्तरी भारत का सुरक्षा ढाँचा और अधिक सशक्त होगा।
उक्त बैठक के दौरान ड्रग्स नियंत्रण, सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से निपटना, रेलवे सुरक्षा, नए आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन,और आपदा प्रबंधन में तकनीक के उपयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई,इसी के साथ सभी प्रतिनिधियों ने अपने-अपने प्रदेशों में लागू की जा रही सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।
उत्तराखण्ड की ओर से पुलिस अधीक्षक (सुरक्षा) मंजूनाथ टी.सी. ने भारत–नेपाल सीमा प्रबंधन पर प्रस्तुति दी, उन्होंने सीमा पार अपराध, मानव व मादक पदार्थों की तस्करी, और स्थानीय जनसहयोग की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।
उक्त बैठक में हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, और चंडीगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने भाग लिया।
सभी ने एकमत से कहा कि तकनीकी सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण, और सूचना साझेदारी के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
समापन सत्र में अपर पुलिस महानिदेशक(अभिसूचना एवं सुरक्षा) ए.पी. अंशुमान ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे मंच न केवल पुलिस बलों के बीच समन्वय को मजबूत करते हैं, बल्कि देश की आंतरिक सुरक्षा में भी अहम योगदान देते हैं।
उक्त बैठक में एडीजी अपराध एवं कानून व्यवस्था वी. गुरूगेशन सहित उत्तराखण्ड पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
