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मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर सीएम धामी ने बढ़ाया हौसला

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मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित कर सीएम धामी ने बढ़ाया हौसला

shikhrokiawaaz.com

10/15/2026


देहरादून:प्रदेश के मेधावी विद्यार्थियों की मेहनत और उपलब्धियों को प्रोत्साहित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि युवा पीढ़ी की प्रतिभा, ज्ञान और कौशल ही उत्तराखंड को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। शिक्षा को आधुनिक तकनीक, नवाचार और भारतीय संस्कृति व जीवन मूल्यों से जोड़कर विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज गुरुवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शैक्षिक उत्कृष्टता पुरस्कार समारोह में वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और शिक्षकों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं में प्रदेश के शीर्ष 10 स्थानों पर जगह बनाने वाले 63 छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत किया गया। इसके साथ ही बेहतर परीक्षा परिणाम देने वाले छह विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को भी सम्मान प्रदान किया गया।



हाईस्कूल परीक्षा में अक्षत गोपाल ने 98.20 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रदेश में पहला स्थान प्राप्त किया। वहीं, इंटरमीडिएट परीक्षा में गीतिका पंत और सुशीला मेहंदीरत्ता ने 98 प्रतिशत अंक प्राप्त कर संयुक्त रूप से प्रदेश में शीर्ष स्थान हासिल किया। सम्मान समारोह में हाईस्कूल के 38 और इंटरमीडिएट के 25 मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इसके अलावा दोनों कक्षाओं में उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने वाले तीन-तीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को प्रशस्ति पत्र और मुख्यमंत्री ट्रॉफी प्रदान की गई।
मुख्यमंत्री ने सम्मानित विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि परीक्षा में मिली सफलता उनके निरंतर परिश्रम, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का परिणाम है। इस उपलब्धि में शिक्षकों के मार्गदर्शन और अभिभावकों के सहयोग की भी अहम भूमिका रहती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 में उत्तराखंड का हाईस्कूल परीक्षा परिणाम 92.10 प्रतिशत और इंटरमीडिएट का परिणाम 85.11 प्रतिशत रहा है। यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विद्यार्थी भविष्य में भी अपनी प्रतिभा के दम पर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएंगे।



कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में नैतिकता, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक समरसता और व्यावहारिक समझ विकसित करना भी है। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद और अंत्योदय के विचार आज भी समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने और एक सशक्त राष्ट्र के निर्माण की प्रेरणा देते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, रोजगारपरक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उत्तराखंड इस नीति को लागू करने वाले अग्रणी राज्यों में शामिल है। राज्य सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ डिजिटल तकनीक, नवाचार और बदलते समय की आवश्यकताओं के अनुरूप ज्ञान भी उपलब्ध कराया जाए।
उन्होंने बताया कि राज्य में शिक्षा के अवसरों को बेहतर बनाने के लिए कई योजनाओं पर काम किया जा रहा है। नंदा गौरा योजना के तहत 12वीं उत्तीर्ण पात्र छात्राओं को 51 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने के लिए 500 विद्यालयों में वर्चुअल क्लासरूम और सेंट्रल स्टूडियो की व्यवस्था की जा रही है। इसके अलावा प्रदेश में 189 अटल उत्कृष्ट विद्यालय स्थापित किए गए हैं। सरकारी स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों को अनिवार्य करने के साथ ही प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है, ताकि विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त हो सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के कारण किसी भी बच्चे की शिक्षा प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से मुख्यमंत्री बालाश्रय योजना के माध्यम से अनाथ बच्चों की निःशुल्क शिक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार चाहती है कि प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को अपनी क्षमता पहचानने, प्रतिभा निखारने और आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।
उत्तराखंड के पूर्ण साक्षर राज्य बनने का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के लिए गर्व की उपलब्धि बताया। उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने में शिक्षकों, अधिकारियों, स्वयंसेवकों और आम नागरिकों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि साक्षरता की यह उपलब्धि आगे बढ़ने की नई जिम्मेदारी भी लेकर आई है। अब लोगों को डिजिटल और वित्तीय साक्षरता के साथ स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता तथा जीवनोपयोगी कौशल से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर प्रयास करने होंगे, ताकि नागरिक आधुनिक तकनीक का लाभ उठाकर अपनी आजीविका बेहतर बना सकें और प्रदेश के विकास में योगदान दे सकें।



मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहने और निरंतर सीखते रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने का संकल्प तभी पूरा होगा, जब यहां की युवा पीढ़ी शिक्षित, कुशल और आत्मनिर्भर बनेगी। प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उपलब्धियां अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के युवा अपनी मेहनत और योग्यता से सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे तथा विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
उक्त समारोह में शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत, विधायक सविता कपूर, सचिव शिक्षा ज्योति यादव, अपर सचिव शिक्षा नमामि बंसल सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।




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