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आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी: सीएम धामी

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आधुनिक शिक्षा के साथ संस्कार भी जरूरी: सीएम धामी

shikhrokiawaaz.com

10/22/2026




देहरादून:मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और नैतिक मूल्यों की समझ भी बेहद जरूरी है। शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना या करियर बनाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक और बेहतर इंसान बनाना भी है।

मुख्यमंत्री बुधवार को देहरादून स्थित द टॉसब्रिज स्कूल में आयोजित संस्कार दिवस एवं स्थापना दिवस समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने विद्यार्थियों को अनुशासन, ईमानदारी, मेहनत और जीवन में अच्छे संस्कार अपनाने के लिए प्रेरित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति हमें बड़ों का सम्मान करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और समाज में आपसी सद्भाव बनाए रखने की सीख देती है। ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना भारत की सांस्कृतिक पहचान है, जो पूरी दुनिया को एक परिवार के रूप में देखने का संदेश देती है। उन्होंने विद्यालय की ओर से आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों को महत्व देने की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि ज्ञान तभी सार्थक होता है, जब उसका उपयोग अच्छे कार्यों और समाज के हित में किया जाए।
विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने पूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि डॉ. कलाम का संघर्ष, समर्पण और उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विद्यार्थियों को उनके जीवन से सीख लेते हुए बड़े लक्ष्य निर्धारित करने चाहिए और उन्हें हासिल करने के लिए लगातार मेहनत करनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने छात्रों को डॉ. कलाम की आत्मकथा ‘विंग्स ऑफ फायर’ पढ़ने की सलाह देते हुए कहा कि यह पुस्तक उन्हें अपने सपनों को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीख लेकर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत तकनीक, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। बदलते समय में विद्यार्थियों के लिए आधुनिक तकनीकों और नए कौशलों का ज्ञान हासिल करना आवश्यक है। इसके साथ ही योग, ध्यान, अनुशासन और नैतिक मूल्यों को जीवन में अपनाना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा और भारतीय संस्कारों का बेहतर तालमेल विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम बनाएगा।
उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें विद्यार्थियों की प्रतिभा निखारने, कौशल विकसित करने और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उत्तराखंड सरकार भी प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप मजबूत बनाने के लिए प्रयास कर रही है। सरकार का लक्ष्य युवाओं को केवल नौकरी पाने तक सीमित रखना नहीं, बल्कि उन्हें स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित करना है, ताकि वे खुद आत्मनिर्भर बनने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर सकें।
मुख्यमंत्री ने राज्य में भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता का जिक्र करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में पारदर्शी भर्ती व्यवस्था के तहत 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है। उन्होंने कहा कि युवाओं को निष्पक्ष अवसर उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है और इस दिशा में लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।



मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि सफलता प्राप्त करने का कोई आसान रास्ता नहीं होता। इसके लिए मेहनत, अनुशासन, ईमानदारी और लगातार सीखते रहने की आदत जरूरी है। प्रत्येक विद्यार्थी के भीतर आगे बढ़ने की क्षमता होती है, जरूरत है अपनी प्रतिभा को पहचानने और सही दिशा में प्रयास करने की। उन्होंने विश्वास जताया कि अच्छे संस्कारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से तैयार होने वाले युवा प्रदेश और देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।


अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश का सर्वश्रेष्ठ राज्य बनाने के संकल्प को पूरा करने में शिक्षित, कुशल और संस्कारवान युवाओं की भूमिका अहम होगी। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने ज्ञान और प्रतिभा का उपयोग समाज एवं राष्ट्र के हित में करने का आह्वान किया।
उक्त कार्यक्रम में विद्यालय प्रबंधन के पदाधिकारी, शिक्षक, अभिभावक, विद्यार्थी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।



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